Thursday, 3 July 2008

तेल का खेल

सिन्धु झा

ऊर्जा सुरक्षा के नाम पर अभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल का खेल जारी रहेगा। तेल की कीमतें बढ़ने के लिए अमेरिका की खाड़ी राजनीति तो जिम्मेवार है साथ ही तेल को एक हथियार के रूप में भी अमेरिका इस्तेमाल कर रहा है। पश्चिमी देश भारत और चीन जैसे विकासशील देशों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि दोनों देश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़कर चुनौती न दे सकें। जानकारों का कहना है कि विश्व स्तर पर मौजूदा मूल्य वृद्धि भारत और चीन पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। भारत सालाना १२_कराे़ड टन कच्चे तेल का आयात करता है। लगभग इतना ही चीन भी आयात कर रहा है। इस समय अमेरिकी, ब्रिटिश, फ्रेंच, जर्मन और रूसी कंपनियों का सिंडीकेट कच्चे तेल की कीमतों को तय करते हैं। न्यूयॉर्क_कमोडिटी_ए सचेंज (निमे स)_में कच्चे तेल का वायदा कारोबार होता है, जिसका लाभ बिचौलिये उठाते हैं। सिंडीकेट बाजार में तेल की कमी दिखाने के लिए कम माल खरीदते हैं और उसे ऊंची कीमत में बेचते हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा_ने बताया कि तेल के कारोबार में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सट्टेबाजी की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं। जब तक सट्टेबाजी पर अंकुश नहीं लगेगा पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें स्थिर नहीं होंगी। कुछ दिनों पूर्व अमेरिकी कंपनी गोल्डमैन_सै स ने कच्चे तेल की कीमत बढ़कर २००_डॉलर प्रति बैरल हो जाने की जो भविष्यवाणी की उसे भी तेल के खेल का एक सुनियोजित हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि तेल सिंडीकेट के सुझाव पर ही गोल्डमैन_ने काल्पनिक बयान दिया था। इस रणनीति को गरीब और विकासशील देशों को तेल के नाम पर डराने की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है। तेल आयातक देशों के लिए सर्वाधिक चिंता की बात अभी तक यह है कि जो भी तेल उत्पादक देश हैं उनकी सरकारें पारदर्शी नहीं हैं। सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब में राजशाही_है, तो लीबिया में तानाशाही है। ईरान में धार्मिक कट्टरपंथ हावी है तो इराक एक विफल राष्ट्र बन चुका है। इन देशों की तेल कंपनियों के साथ पश्चिमी सिंडीकेट का 'अनहोली`_यानी अपवित्र सांठगांठ होना बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार मौजूदा स्थिति में भारत और चीन में तेल की जितनी खपत बढ़ेगी उसी आधार पर विश्व बाजार में तेल के दाम भी बढ़ाए जाएंगे। पश्चिमी देशों की पूरी कोशिश और दबाव है कि भारत पेट्रोलियम पदार्थों से सब्सिडी पूरी तरह हटाए।

-साभार अमर उजाला

Wednesday, 25 June 2008

मोबाइल के फायदे

----मोबाइल के फायदे ----
आज हर कोई मोबाइल का आदी होता जा रहा है। इस के बढ़ते नशे ने हर एक को जकड़ लिया है। चाहे वो बच्चा हो जा बुजुर्ग कोई नही जो इस नशे को छोड़ने को तैयार हो। इस नशे का असर हमारी समरण शक्ति पर भी हो रहा है। जिस से हम सब अंजान है। पहले जहां हर बात हम आसानी से याद रखते थे आज हम छोटी-छोटी बात के लिए मोबाइल पर निर्भर होने लगे हैँ। चाहे कोई अपना काम हो या फिर किसी को याद कराने का काम। हर छोटी बात को मोबाइल पर डाल कर याद करने की कोशिश करना कितना आसान लगने लगा है। इतना ही नही मोबाइल की मैमोरी मैं अपने रोजाना मैं इस्तेमाल होने वाले नंबर को लिख कर कितना हल्का महसूस होता है जैसे कितना बढ़ा बोझ उतर गया। बस एक बटन दबाया और मिल गया नंबर। जिसे याद करने के लिए हम कितनी कोशिश करते घर की दीवार, कॉपी या डायरी का इस्तेमाल होता था। पहले हम को नंबर भी याद रहते थे। पर आज याद रखने का सवाल ही नही होता मोबाइल है न हर मर्ज़ की दवा। मोबाइल का एक और फायदा देखने को मिल रहा है। आसानी से हम झूठ बोलने के आदी होते जा रहे है। इतना ही नही एसएमएस फंडा भी बडा काम का है। जहां भी बैठे हो बात करो किसी को कानों कान ख़बर नही कहा लगे हो। साइंस के तरक्की करने का फायदा किसी को मिले न मिले प्रेम रोग के शिकार मरीज़ इस का भरपूर लाभ ले रहे हैँ। अब घर में चिठ्ठी पकड़े जाने का डर भी ख़तम हो गया हैँ मोबाइल पर संदेश भेजा और उत्तर के लिए इंतजार भी नही करना पड़ता। लेकिन कहते है की मोबाइल का ज्यादा फायदा नुकसान की देता है। इस लिए इस्तेमाल करेँ पर संभल कर।

Tuesday, 24 June 2008

ऐ भाई जरा सोचो तो

.......... ऐ भाई जरा सोचो तो आज इतनी तेज रफ्तार जिन्दगी में हर वक्त बस कल की चिंता में डूबे रहते है। आज के बारे में सोचने बेठै तो भी कल की चिंता सताने लगती है की कल कैसा होगा कल किया होगा। इस चक्कर में लोग पंडितो और तांत्रिको के दरवाज़े पर दस्तक देने वालो की भीड़ बढ़ती जा रही है। अपनी जेब ढ़ीली कर लोग उन को माला माल कर रहे है। जरा भाई एक पल के लिए मेरी बात पर गौर तो फरमाएं की किस के दहलीज पर आप माथा टेकने जा रहे है। अगर वो कल के बारे में जानते तो किया अपना कल ना सवार पाते। क्यों ये दुकानदारी खोल कर लोगों की आंखों पर पट्टी बांधने का काम करते। लेकिन आप तो अपना कल ख़ुद ही खराब कर रहे हैं । इन की जेब भर कर। ये मैं इस लिए बता रही हूं। आज मेरे पास कुछ इस तरह का मामला आया तांत्रिको के चक्कर में पड़ कर एक आदमी ने अपनी पूंजी तो गवां दी साथ में अपना जीवन भी तबाह कर लिया। रोज अखवारो के पन्नो पर एक आध ऐसी खबर पढ़ने को मिल ही जाती है जिस में तांत्रिक के चक्कर में लड़के या लड़की की बलि दे दी। लेकिन फिर भी हम पढ़े लिखे लोग आंखों पर पट्टी बांध कर उन के दरवाजों पर पहुंच जाते है। एक तरफ तो हम सब कहते रहते हैं हम पढ़े लिखे हैं, लेकिन दूसरी तरफ़ अनपढ़ लोगों की तरह इन की बातों पर बिश्वास कर आंखे बंद कर लेते हैं। पता नही कब हम लोग गहरी नींद से जग पायेंगे और कब तक हम इन के चक्कर मै अपनी जमा पूंजी को बर्बाद करते रहेंगे। उस पल का इंतजार मुझ को तो हैं। अगर आप को हैं तो ख़ुद से शुरूआत करेँ। क्योंकि एक-एक जुड़ कर ही काफिला तैयार होगा और हम नया सवेरा ला पांएंगें।

Friday, 20 June 2008

ताकि बलात्कार का सौदा न हो

राष्ट्रीय महिला आयोग ने बलात्कार पीड़ित महिलाआें को दो लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई है। इस पैसे से उन्हें पुनर्वास, चिकित्सा और कानूनी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय महिला आयोग के इस प्रस्ताव पर महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी ने अपनी मुहर लगा दी है। इसमें २०,००० रुपये तत्काल सहायता, ५०,००० रुपये चिकित्सा सहायता और पुनर्वास के लिए दी जाएगी। इसके बाद एक लाख तीस हजार रुपये की अंतिम राशि दी जाएगी।
आयोग की यह पहल निश्चय ही स्वागत योग्य है, लेकिन विभिन्न सरकारी योजनाआें की दशा को देखते हुए मन में कई सवाल भी खड़े करती है। कुछ हजार रुपये के लिए जान तक लेने पर उतारू अपराधी किस्म के लोग सरकारी योजना के दो लाख रुपये हथियाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे नहीं अपनाएंगे, ऐसा सोचना भी गलत होगा। दो लाख के लोभ में बलात्कारी और बलात्कार पीड़ित साथ मिलकर साजिश रच सकते हैं। संभव है कि बलात्कार की पुष्टि करने वाले सेहत मुलाजिम, केस की जांच करने वाले पुलिसकर्मी और दो लाख की सहायता मंजूर करने वाले सरकारी अधिकारी तक अपना हिस्सा तय कर इस साजिश में शामिल हो जाएं। ऐसे में बलात्कार के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह तय करना मुश्किल हो जाएगा कि सहायता का सच्चा हकदार कौन है। यदि ऐसा हुआ तो वास्तविक पीड़ित दो लाख रुपये पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर ही काटती रह जाएंगी।
योजना को लेकर कुछ आशंकाएं तो आयोग को भी हैं, तभी तो आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास कहती हैं कि इसे लागू करने से पहले सहायता के मापदंड बनाए जाएंगे, जिससे इसका दुरुपयोग न हो सके। आयोग को चाहिए कि मापदंड तय करने से पहले इसके विभिन्न पहलुआें पर विशेषज्ञों से राय ले, ताकि पूरी तरह दुरुस्त योजना तैयार हो सके, जिसमें जालसाजों के लिए झोल न हो और पीड़ित पापड़ न बेलते रह जाएं।

एक तरफ मिन्नतें, दूसरी तरफ पिटाई

एक तरफ मिन्नतें, दूसरी तरफ पिटाई
बिहारी मजदूरों से ये कैसी प्रीत निभाई
पंजाबी एक तरफ बिहारी मजदूरों की मिन्नतें कर रहे हैं कि वे उनके खेतों की देखभाल करे, वहीं दूसरी ओर काम कर रहे मजदूरों का पैसा मांगने पर पीटा भी जा रहा है। ऐसा ही हुआ है तरनतारन के गांव स्कतरा में, जहां धान लगवाई गत वर्ष से अधिक मांगने पर जमींदारों के लड़कों ने गरीब मजदूरों के घर पर हमला करके उनकी धुनाई कर दी। हमलावरों ने घर की महिलाआें, व्यि तयों को जाति सूचक शब्द व बेइ्ज्जत करके घरों के सामान की तोड़फोड़ भी भी। घरों में लगाई सब्जी और छायादर पे़ड भी काट डाले। गांव के ही कुछ लोगों की मदद से पीड़ितों ने डीसी को शिकायत भी कर दी है।
गांव के खेत मजदूर कश्मीर सिंह, सुखदेव सिंह, कुलवंत सिंह व जसविंदर सिंह ने बताया कि आज के मंहगाई युग में कोई मजदूर अपने खून-पसीने से मेहनत कर अपनी मजदूरी अधिक मांग लेता है तो बदले उनके साथ मारपीट की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि धान लगाने की एवज में मजदूरों ने अधिक देहाड़ी मांगी थी। लेकिन जमीदारों ने पहले तो देने से इनकार कर दिया। फिर जब उनसे काम लिया गया तो उन्हें कम पैसे टकाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर जमींदारों के लड़कों ने बीती रात मजदूरों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। कई लोगों को चोटें आई है।

Thursday, 19 June 2008

आस्था से खिलवाड़

बाबा बर्फानी की एक झलक पाने के लिए महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद पहलगाम पहुंचे श्रद्धालुआें को दर्शन से पहले बुधवार को लाठियां खानी पड़ी। कई श्रद्धालु चोटिल हुए, जबकि इस दौरान मची भगदड़ में कई बेहोश हो गए। महिलाआें, बच्चों और बुजुर्ग श्रद्धालुआें को खास तौर पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस बदइंजामी के लिए श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। आतंकियों की धमकी को नजरअंदाज कर और मौसम की चुनौतियों से जूझने के जज्बे के साथ जान जोखिम में डालकर देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुआें को कम से कम इतनी उम्मीद तो रही ही होगी कि सरकार और यात्रा के प्रबंध में जुटी संस्थाएं उनकी मुश्किलें कम करेंगी। लेकिन हुआ ठीक उसके उलट। यह आस्था से खिलवाड़ नहीं तो और या है?
इस सालाना धार्मिक आयोजन के लिए सालभर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चलता है, देश और प्रदेश की सरकारें तमाम प्रबंधों की समीक्षा करती हैं और विभिन्न इंतजामों के नाम पर बड़ी राशि खर्च भी की जाती है। इसके बावजूद सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर से तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए पहलगाम पहुंचे श्रद्धालुआें को बदइंतजामी का सामना करना पड़ा है, यह अत्यंत निंदनीय है। पहले ही दिन रिकार्ड करीब २५ हजार श्रद्धालुआें ने पवित्र गुफा में बाबा के दर्शन किए। एक दिन में अधिकतम १० हजार श्रद्धालुआें की पाबंदी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में भ तों के दर्शन करने से श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है। या श्राइन बोर्ड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर सरकार भी तत्काल जरूरी कदम उठाएगी, ताकि ऐसी घटनाआें की पुनरावृत्ति न हो?

Wednesday, 18 June 2008

जनता ने कुर्सी वापस खिंची

(जन प्रतिनिधियों के दुर्व्यवहार को दूर करने के लिए सांसदों और विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार मतदाताआें को होना चाहिए -सोमनाथ चटर्जी, लोकसभा अध्यक्ष)

छत्ताीसगढ़ में मतदाताआें ने तीन नगर पंचायत अध्यक्षों को वापस बुलाया
काम से जी चुराने वाले और भ्रष्ट ाचार में लिप्त महानुभावों के लिए अब चेत जाने का समय आ गया है। देश के इतिहास में पहली बार छत्तीसगढ़ के दो जिलों की जनता ने मतदान के जरिए तीन नगर पंचायत अध्यक्षों की कुर्सी वापस खींच ली है। जाहिर है अब काम नहीं करने वाले जन प्रतिनिधियों को कुर्सी नहीं मिलेगी। राज्य के दुर्ग जिले में नवागढ़, गंुडरदेही और अंबिकापुर जिले की राजपुर नगर पंचायतों के अध्यक्षों को जनता ने हटा दिया है।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सोमवार को मतसंग्रह कराया गया गया था और वोटिंग के नतीजे मंगलवार को घोषित किए गए। यह भी एक संयोग है कि पिछले शुक्रवार को ही लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने तिरुवनंतपुरम में कहा था कि काम नहीं करने वाले और दुर्व्यवहार करने वाले सांसदों और विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार मतदाताआें को मिलना चाहिए। छत्तीसगढ़ के चुनाव अधिकारी सुशील त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के मुताबिक मतदाताआें को काम नहीं करने वाले नगर पंचायत अध्यक्षों को वापस बुलाने का अधिकार है। इसी अधिनियम के तहत मतदान कराया गया। गुंडरदेही नगर पंचायत अध्यक्ष भारती सोनकर के खिलाफ पार्षद लंबे समय से अभियान छे़डे हुए थे। उन पर राजनीतिक वजहों से विकास कार्यों में बाधा डालने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे थे। गंुडरदेही के कुल ३४२५ मतदाताआें ने इस मतदान में शिरकत की। इनमें से १९९७ वोटरों ने भारती को हटाए जाने का समर्थन किया तो १३८९ लोग नगर पंचायत प्रमुख को बनाए रखने के पक्ष में थे। ५९ वोट अवैध घोषित किए गए।
इसी तरह दुर्ग जिले की ही नवागढ़ नगर पंचायत के अध्यक्ष सीताराम गे़डेकर को हटाए जाने के मसले पर मत देने पहुंचे कुल २०२३ शहरवासियों में से ११४६ ने प्रस्ताव पर सहमति दी तो ८०० लोगों ने बरखास्तगी का विरोध किया। ७१ लोगों के मत खारिज कर दिए गए। निर्दलीय चुनाव लड़कर नगर अध्यक्ष बने गे़डेकर की जाति को लेकर विवाद था और विकास कार्यों में रुचि न लेने के आरोप भी उन पर लगाए जा रहे थे।
अंबिकापुर जिले की राजपुर पंचायत भी इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की गवाह बनी। यहां के नगर पंचायत अध्यक्ष खोरेन खल्को विपक्षी दल भाजपा के साथ अपने साथी कांग्रेसजनों के भी निशाने पर थे। लंबे अभियान के बाद उन्हें हटाए जाने के प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। इस वोटिंग में १५९५ वोटरों ने हिस्सा लिया। इनमें से ८१३ निवासियों ने खल्को को नकार दिया तो ७४० मतदाताआें ने उन्हें बनाए रखने का समर्थन किया।

छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, १६१ की धारा ४७ के मुताबिक अगर नगर पालिका के तीन चौथाई चुने हुए प्रतिनिधि नगर निगम के अध्यक्ष को हटाने के लिए जिलाधिकारी को लिखित में अर्जी देते हैं तो जिला प्रशासन इसकी जांच कर राज्य सरकार को अपनी सलाह भेजता है। इसके बाद राज्य सरकार चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजती है जिससे अध्यक्ष के भाग्य का फैसला हो सके।

कैसे होता है चुनाव
मत पत्र पर दो कुर्सियों के निशान होते हैं। एक कुर्सी पर किसी व्यि त को बैठे हुए दिखाया जाता है जबकि दूसरी कुर्सी खाली होती है। अगर मतदाता चुने हुए प्रतिनिधि को वापस बुलाना चाहते हैं तो उन्हें खाली कुर्सी पर मुहर लगानी होती है। अगर मतदाता संबंधित जन प्रतिनिधि को सत्ता में बनाए रखना चाहते हैं तो कुर्सी पर बैठे हुए व्यि त पर मुहर लगानी पड़ती है।

इन देशों में है स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार

अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, वेनेजुएला