दिल्ली मेट्रो केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश की शान है। उसकी चमकती ट्रेन, दमकते प्लेटफॉर्म और टिकट वितरण आदि की व्यवस्था सभी को पसंद है। लेकिन इस चमक-दमक के तले काम करने वालों की स्थिति के अंधेरे पक्ष के बारे में शायद बहुत कम लोगों को पता है, क्योंकि मेट्रो का प्रबंधन मीडिया को इस तरह मैनेज करता है कि केवल उसका उजला पक्ष ही लोगों के सामने आता है। अब, मेट्रो के कर्मचारी अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने लगे हैं, जिसका समर्थन लोकतांत्रिक मूल्यों में यकीन करने वाले हर व्यक्ति को चाहिए।
कल, यानी 25 मार्च को मेट्रो के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मेट्रो भवन के सामने विरोध-प्रदर्शन किया और नारे लगाए। जनसत्ता में छपी खबर के अनुसार मेट्रो कामगार संघर्ष समिति के बैनर तले मेट्रो के कामगार और मजदूरों ने न्यूनतम वेतन, साप्ताहिक छुट्टी और चिकित्सा सुविधा आदि की मांग को लेकर मेट्रो भवन के सामने प्रदर्शन किया। मजदूरों का कहना है कि उनसे 12-12 घंटे तक काम लिया जाता है और न्यूनतम मजदूरी 186 रुपये की जगह 90-100 रुपये ही दिये जाते हैं। द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार न मजदूरों को कहना है कि उन्हें न तो पहचान पत्र दिए गए हैं और न ही प्रॉविडेंट फंड का अकाउंट खोला गया है। उनका आरोप है कि ठेकेदार मजदूरों के साथ बुरा बर्ताव करते हैं और उन्हें कभी-कभी सप्ताह में बिना छुट्टी के सातों दिन काम करना पड़ता है। इंडोपिया डॉट इन के अनुसार अपनी मांगे उठाने पर मजदूरों के साथ गाली-गलौज की जाती है और उन्हें धमकी दी जाती और यहां तक नौकरी से भी निकाल दिया जाता है।
Thursday 26 March 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

1 comments:
बहुत बुरी स्थिति है इन मजदूरों की ... इन्हें आवाज उठाने ही चाहिए।
Post a Comment