राज ठाकरे और उनके मवालियों के बारे में कुछ लिखने से पहले काफी देर तक सोचता रहा। गरज ये थी कि ऐसे लोगों के बारे में कुछ लिखना अपनी उर्जा और आपका वक़्त, दोनों बर्बाद करना है। लेकिन दूसरा ख्याल ये था कि अगर 'ठाकरों' के बारे में कुछ नहीं लिखा, तो शायद ये अपने ज़मीर और अपनी कलम के साथ गद्दारी होगी। लिहाज़ा, काफ़ी जद्दोजहद के बाद आखिरकार लिखने का फ़ैसला किया।
सभी जानते हैं कि किसी बच्चे बहकते कदमों को अगर वक़्त रहते नहीं रोका जाए, तो ये कदम अक्सर इतनी दूर नहीं निकल जाते हैं कि फिर उसके लिए लौटना मुश्किल हो जाता है। राज ठाकरे बच्चे तो नहीं हैं, लेकिन उनकी बदमाशियों पर महाराष्ट्र सरकार समेत ज़्यादातर राजनीतिक और गैरराजनीतिक हस्तियों की चुप्पी मुझे एक लापरवाह अभिभावक की जैसी ज़रूर लगती है। कहने की ज़रूरत नहीं है कि राज ठाकरे को अगर वक़्त रहते ही एक मराठी होने से पहले एक हिंदुस्तानी होने का पाठ पढ़ा दिया जाता, तो आज महाराष्ट्र नफ़रत की आग में इस तरह धू-धू कर नहीं जल रहा होता।
मराठी मानुष तरक्की करें, इससे भला किसे ऐतराज़ होगा? महाराष्ट्र में करें, इससे भी किसी को क्या शिकायत होगी? लेकिन मराठियों की तरक्की और उनके लिए जगह बनाने के नाम पर अगर किसी दूसरे सूबे से आए बेगुनाह लोगों के साथ अमानुषिक हरकत की जाए, तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लेकिन जिस तरह पहले ही दिन से महाराष्ट्र सरकार राज नाम के 'नासूर' को हल्के तौर पर ले रही है, ये उसी का नतीजा है कि आज हालात हाथ से बाहर होते जा रहे हैं। कुछ माह पहले जब राज ने मराठियों को रिझाने के लिए गैरमराठियों का अपमान किया था, जया बच्चन के बहाने यूपी-बिहार पर हमला बोला था, तभी अगर उन्हें कानूनी तौर पर कड़ी सबक सिखा दी गई होती, तो आज महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मवालियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते। लेकिन तब महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले पर कानूनी राय लेने की बात कह कर इसे अनदेखा करने की कोशिश की। इससे पहले भी सरकारें उनके चाचा बाल ठाकरे के साथ ऐसा ही करती रही हैं। लेकिन सोचिए कि अगर ऐसी ही कोई हरकत किसी आम आदमी ने की होती, तो यही सरकार और इसी पुलिस ने उसी कानून की दुहाई दे कर उस आम आदमी की खाल में भूसा भर दिया होता।
जैसे किसी की जान लेनेवाला शख़्स भी ख़ुद को हर हाल में जस्टीफ़ाई करने की कोशिश करता है, ठीक उसी तरह अपनी गुंडागर्दी के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी ख़ुद को सही साबित करने में जुटी है। उस रोज़ जब एक चैनल के एंकर ने राज के एक चेले (कोई राऊत नाम है उसका) से इन हरकतों का सबब पूछा तो उसने झट असम और उत्तर पूर्व के राज्यों में जारी बिहारी विद्वेष की दुहाई दे डाली। मानों उत्तर पूर्व के कुछ लोग अगर बिना सोचे समझे कुएं में कूद जाएं, तो वो भी कूद जाएंगे। लेकिन इन मवालियों को ये कौन समझाए कि अगर तमाम मराठियों के साथ पूरे देश में भी यही सुलूक किया जाने लगे, तो महाराष्ट्र और मराठी मानुष का क्या होगा? वैसे जमशेदपुर में जिस तरह टाटा मोटर्स के अधिकारी एस।बी. बोरवंकर (मराठी होने की वजह से) के घर हमला हुआ, उससे तो लगता है कि अब शायद इस तरह की वारदातों की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन ये सिर्फ़ मराठियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चिंता की बात है। क्योंकि अगर हर तरफ़ क्षेत्रीयता के नाम पर लड़ाई शुरू हो जाए, तो किसी गृहयुद्ध से कम नहीं होगा। लेकिन भला हो हमारे मुल्क के राजनेताओं का, जिन्हें वोटबैंक के सिवाय शायद कुछ भी नज़र नहीं आता।
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अपने एक पत्रकार साथी ने राज की करतूतों पर कुछ ऐसे विचार भेजे हैं। आप भी ग़ौर करें।
Yes, we all should support Raj Thackeray and take his initiative ahead by doing more...
We should teach our kids that if he is second in class, don't study harder.. just beat up the student coming first and throw him out of the school
Parliament should have only Delhiites as it is located in delhi
Prime-minister, president and all other leaders should only be from Delhi
No Hindi movie should be made in Bombay. Only Marathi.
At every state border, buses, trains, flights should be stopped and staff changed to local men
All Maharashtrians working abroad or in other states should be sent back as they are SNATCHING employment from Locals
Lord Shiv, Ganesha and Parvati should not be worshiped in our state as they belong to north (Himalayas)
Visits to Taj Mahal should be restricted to people from UP only
Relief for farmers in Maharashtra should not come from centre because that is the money collected as Tax from whole of India, so why should it be given to someone in Maharashtra?
Let's support Kashmiri Militants because they are right in killing and injuring innocent people for the benefit of their state and community..
Let's throw all MNCs out of Maharashtra, why should they earn from us? We will open our own Maharashtra Microsoft, MH Pepsi and MH Marutis of the world
Let's stop using cellphones, emails, TV, foreign Movies and dramas. James Bond should speak Marathi
We should be ready to die hungry or buy food at 10 times higher price but should not accept imports from other states
We should not allow any industry to be setup in Maharashtra because all machinery comes from outside
We should STOP using local trains... Trains are not manufactured by Marathi manoos and Railway Minister is a Bihari
Ensure that all our children are born, grow, live and die without ever stepping out of Maharasthra, then they will become true Marathis
--Sumit Nagpal